राजीनामा (कहानी) : विजयदान देथा 'बिज्जी' Rajinama (Hindi Story) : Vijaydan Detha 'Bijji'
राजीनामा (कहानी) : विजयदान देथा 'बिज्जी' Rajinama (Hindi Story) : Vijaydan Detha 'Bijji' बढ़ती उम्र के साथ-साथ जिन्दगी की घटनाएँ समय की राख तले दबती जाती हैं, पर कभी-कभार ठेठ बचपन की कोई बात सारी उम्र नहीं बुझती, राख के नीचे ज्यों-की-त्यों जगमग करती मिल जाती है ! आज तो मैं एक लेखक की मर्यादा निभा रहा हूँ, पर उन दिनों कोरा मोरा एक पाठक ही था। पढ़ने लायक कोई किताब हाथ लगी नहीं कि गटागट आँखों से पी जाता! शायद, नौवीं कक्षा में पढ़ता होऊँगा, तब की बात है। मैं खुद तो घर पर ही रहता था, पर संगी-साथियों से मिलने की उमंग में दूसरे-तीसरे दिन चारण होस्टल का चक्कर काट आता। स्वभाव तो सभी लड़कों का अलग-अलग होता है, पर गढ़सूरिया गाँव का रामकरण एक बेढब स्वभाव तथा निराली सूरत का लड़का था । मतीरे की तरह गोल सफाचट खोपड़ी । लम्बी चोटी | थुलथुल शरीर । कील - मुँहासों से भरा गोल चेहरा | मिची मिची आँखें, मानो उस्तरे से चीरा देकर अन्दर बिठाई गयी हों! किसी से भी अधिक मेल-मुलाकात नहीं - एकलखोरा । बतलाने पर भी मुश्किल से बोलता । अपने ही दन्द-फन्द में उलझा हुआ । मन करता तभी एक चमचमाता काँच लेकर म...